Jammu SMVD Medical College Closed: 44 Muslim Students Controversy & MP Cow Dung Scam Exposed - Ravish Kumar Style Full Report

गोबर का घोटाला और डॉक्टर का ताला: 'विश्वगुरु' भारत की वैज्ञानिक आत्महत्या की एक विस्तृत चार्जशीट

(वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार की शैली में एक विस्तृत खोजी रिपोर्ट)


भूमिका: जब विज्ञान हार जाए और नफरत जीत जाए

नमस्कार।

jammu smvd medical College


हम जिस वक्त में जी रहे हैं, उसे इतिहास कैसे याद रखेगा? क्या उसे उस दौर के रूप में याद किया जाएगा जब भारत ने चाँद के दक्षिणी ध्रुव पर अपना झंडा गाड़ा था, या उस दौर के रूप में जब हमने अपने ही शिक्षण संस्थानों पर ताले जड़ दिए थे, सिर्फ इसलिए क्योंकि वहाँ पढ़ने वाले छात्रों के नाम और उनकी प्रार्थना करने का तरीका बहुसंख्यक आबादी की 'भावनाओं' को रास नहीं आया? आज की यह रिपोर्ट महज दो खबरों का विश्लेषण नहीं है। यह एक 'पोस्टमार्टम' है—उस सोच का, उस राजनीति का और उस व्यवस्था का, जो धीरे-धीरे हमारे देश की रगों में जहर घोल रही है।


एक तरफ जम्मू की त्रिकुटा पहाड़ियों की तलहटी में, कटरा शहर में एक अत्याधुनिक मेडिकल कॉलेज को रातों-रात इसलिए बंद कर दिया जाता है क्योंकि मेरिट लिस्ट में मुसलमानों की संख्या ज्यादा थी। दूसरी तरफ, भारत के हृदय स्थल मध्य प्रदेश में, एक यूनिवर्सिटी में "गोबर और गोमूत्र" से कैंसर ठीक करने के नाम पर करोड़ों रुपये पानी की तरह—माफ कीजिए, गोमूत्र की तरह—बहा दिए जाते हैं, और नतीजा निकलता है 'शून्य'।


आज हम इन दो घटनाओं की गहराइयों में उतरेंगे। यह रिपोर्ट 20-25 पन्नों का वह दस्तावेज है जो तथ्यों, आंकड़ों और तर्कों की कसौटी पर यह परखेगा कि क्या हम वास्तव में विकास के पथ पर हैं, या हम विनाश की एक ऐसी ढलान पर फिसल रहे हैं जहाँ नीचे सिर्फ अंधकार है।


भाग 1: 'द बिग रिवील' - माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज का हत्यारा कौन?

1.1 सपनों का शिलान्यास और हकीकत का विध्वंस

कहानी शुरू होती है जम्मू के रियासी जिले से। यहाँ श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड (SMVDSB) द्वारा संचालित श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस (SMVDIME) स्थित है। यह कोई साधारण अस्पताल नहीं था। वर्ष 2016 में स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसके संबद्ध अस्पताल—नारायणा सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल—का उद्घाटन किया था 1। यह उम्मीद जताई गई थी कि यह संस्थान जम्मू क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ बनेगा और यहाँ से निकलकर डॉक्टर देश की सेवा करेंगे।


साल 2025 आया। कॉलेज ने अपने पहले MBBS बैच के लिए दरवाजे खोले। कुल 50 सीटें थीं। प्रवेश की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी थी—NEET (National Eligibility cum Entrance Test) के माध्यम से। यह वही परीक्षा है जिसे भारत सरकार आयोजित करती है और जिसे 'मेरिट' का सर्वोच्च पैमाना माना जाता है।


लेकिन जैसे ही 50 छात्रों की सूची बाहर आई, जम्मू की सड़कों पर सन्नाटा नहीं, शोर गूँजने लगा। 50 में से 44 छात्र मुस्लिम समुदाय से थे 1। शेष में कुछ हिंदू और एक सिख छात्र था। क्या यह मेरिट का जश्न होना चाहिए था? नहीं। यह नफरत का कारण बन गया। जम्मू के डोगरा समाज के कुछ स्वयंभू ठेकेदारों और दक्षिणपंथी संगठनों को यह बात चुभ गई कि "माता के पैसों" से बने कॉलेज में "दूसरे धर्म" के बच्चे कैसे पढ़ सकते हैं।


1.2 विरोध का 'सांप्रदायिक' गणित

विरोध प्रदर्शनों की अगुवाई युवा राजपूत सभा, बजरंग दल और लगभग 60 अन्य धार्मिकसामाजिक संगठनों ने की। उनके तर्क थे:


फंडिंग का स्रोत: चूँकि कॉलेज श्राइन बोर्ड के धन से बना है, जो हिंदू श्रद्धालुओं का चढ़ावा है, इसलिए इसका लाभ केवल या मुख्यतः हिंदुओं को मिलना चाहिए।

जनसांख्यिकीय खतरा: उन्होंने इसे "जम्मू की जनसांख्यिकी बदलने" की एक साजिश बताया। उनका कहना था कि मुस्लिम छात्र यहाँ का माहौल खराब करेंगे (मांसाहार, नमाज आदि के काल्पनिक डर दिखाए गए)।

यह विरोध इतना उग्र और सुनियोजित था कि प्रशासन घुटने टेकने पर मजबूर हो गया। जो 'मेरिट' किसी भी सभ्य समाज में गर्व का विषय होती है, उसे यहाँ 'अपराध' बना दिया गया।


भाग 2: 'डीप डाइव' - नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC): नियामक या राजनीतिक हथियार?

इस पूरी कहानी में सबसे संदिग्ध भूमिका नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) की रही है। NMC का गठन मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) की जगह इसलिए किया गया था ताकि चिकित्सा शिक्षा में भ्रष्टाचार खत्म हो और पारदर्शिता आए। लेकिन इस मामले में NMC ने जो किया, वह किसी 'सुपारी किलर' के काम जैसा प्रतीत होता है।


2.1 निरीक्षण का 'नाटक' और समय की पाबंदी

घटनाक्रम की टाइमलाइन पर गौर करें, तो एक भयावह तस्वीर उभरती है:


सितंबर 2025: NMC ने कॉलेज का निरीक्षण किया और सब कुछ संतोषजनक पाते हुए शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए Letter of Permission (LoP) जारी किया।

नवंबर-दिसंबर 2025: प्रवेश प्रक्रिया पूरी हुई। मुस्लिम छात्रों का बहुमत सामने आया। विरोध शुरू हुआ।

2 जनवरी 2026: NMC की टीम 'औचक निरीक्षण' (Surprise Inspection) के लिए पहुँचती है।

6 जनवरी 2026: LoP रद्द कर दी जाती है और कॉलेज को बंद करने का फरमान सुना दिया जाता है 4।

कॉलेज फैकल्टी और छात्रों का आरोप है कि 2 जनवरी का निरीक्षण एक 'फार्ंस' (Farce) था। टीम ने मुश्किल से 15 मिनट से लेकर कुछ घंटों का समय बिताया। क्या 300 करोड़ से अधिक की लागत से बने, 467 बिस्तरों वाले अस्पताल और कॉलेज का निरीक्षण 15 मिनट में संभव है? 1


2.2 कमियों का 'मैन्युफैक्चर्ड' पुलिंदा

NMC ने कॉलेज बंद करने के लिए जो कारण गिनाए, वे तकनीकी रूप से सही हो सकते हैं, लेकिन व्यावहारिक रूप से हास्यास्पद हैं:


फैकल्टी की कमी: 39% टीचिंग फैकल्टी और 65% ट्यूटर्स की कमी बताई गई।

इंफ्रास्ट्रक्चर: लेक्चर थियेटर और लाइब्रेरी में कमियाँ।

क्लिनिकल मटीरियल: ओपीडी में मरीजों की कम संख्या।

यहाँ शैली में एक सवाल पूछना जरूरी है: क्या ये मानक भारत के अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों पर भी लागू होते हैं?

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आइए, एक तुलनात्मक विश्लेषण (Comparative Analysis) करते हैं, जो यह साबित करेगा कि कानून का इस्तेमाल 'लक्ष्य' देखकर किया गया है।

Mp ki ghotale ki report


यह डेटा चीख-चीख कर कह रहा है कि SMVDIME को इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी के कारण नहीं, बल्कि "छात्रों की पहचान" के कारण बंद किया गया है। जब एम्स जैसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों में 40% पद खाली होने पर उन्हें बंद नहीं किया जाता, तो एक नए कॉलेज को, जिसे शुरू हुए अभी चार महीने भी नहीं हुए थे, इतना कठोर दंड क्यों?


2.3 सर्दियों की छुट्टियों का बहाना

कॉलेज प्रशासन ने स्पष्टीकरण दिया कि जब निरीक्षण हुआ (2 जनवरी), तब सर्दियों की छुट्टियां (Winter Vacation) चल रही थीं। लगभग 50% स्टाफ छुट्टी पर था। यह एक सामान्य प्रक्रिया है। लेकिन NMC ने इसे "फैकल्टी की कमी" मान लिया 6। यह वही तर्क है जैसे कोई रविवार को बैंक जाए और कहे कि "बैंक बंद है, इसलिए इसका लाइसेंस रद्द कर दो।"


भाग 3: 'राजनीतिक हंगामा' - जश्न, मातम और चुप्पी

3.1 नफरत का जश्न

6 जनवरी 2026 को जब कॉलेज की मान्यता रद्द होने की खबर आई, तो जम्मू के कुछ हिस्सों में दीवाली जैसा माहौल था। बजरंग दल और श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति के कार्यकर्ताओं ने मिठाइयां बांटीं और पटाखे फोड़े 7।


ज़रा सोचिए, एक ऐसे देश में जहाँ विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों के अनुसार डॉक्टर-मरीज अनुपात बेहद खराब है, वहाँ एक मेडिकल कॉलेज के बंद होने पर जश्न मनाया जा रहा है। यह जश्न इस बात का नहीं था कि कोई गलत काम रुका है, बल्कि इस बात का था कि "उन्हें" (मुसलमानों को) पढ़ने नहीं दिया गया। यह सामूहिक मानसिक दिवालियापन का प्रमाण है।


3.2 उमर अब्दुल्ला का तीखा सवाल

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस पर बेहद तार्किक और तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा:


"अगर आप एक मेडिकल कॉलेज के बंद होने पर जश्न मना रहे हैं, तो आप अपने बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। देश के दूसरे हिस्सों में लोग कॉलेज खुलवाने के लिए लड़ते हैं, और यहाँ बंद करवाने के लिए। अगर धर्म ही शिक्षा का आधार है, तो संविधान से 'सेक्युलर' शब्द हटा दीजिए।" 1


उमर अब्दुल्ला का यह बयान उस दर्द को बयां करता है जो एक प्रशासक महसूस करता है जब राजनीति विकास के रास्ते में आ जाती है। उन्होंने भाजपा और प्रदर्शनकारियों को आईना दिखाते हुए कहा कि ये सीटें 'ओपन मेरिट' और 'डोमिसाइल' नियमों के तहत भरी गई थीं, जो केंद्र सरकार के ही नियम हैं।


3.3 छात्रों की आवाज: मनीत और अलीना

इस नफरत की आंधी में सबसे ज्यादा नुकसान उन 50 छात्रों का हुआ, जिन्होंने दिन-रात एक करके NEET पास किया था।


मनीत (हिंदू छात्र): मनीत ने मीडिया के सामने आकर कहा, "कॉलेज में सब कुछ बहुत अच्छा था। पढ़ाई अच्छी हो रही थी। हमें समझ नहीं आ रहा कि इसे क्यों बंद किया गया।" 1

अलीना (मुस्लिम छात्रा): "हम सदमे में हैं। हम यहाँ पढ़ने आए थे, राजनीति करने नहीं। हमारे भविष्य का क्या होगा?" 2

ये छात्र अब "सुपरन्यूमरेरी सीट्स" (Supernumerary Seats) के तहत इधर-उधर भटकाए जाएंगे, लेकिन उनका वो सपना टूट गया जो उन्होंने एक प्रतिष्ठित संस्थान में पढ़ने का देखा था।



भाग 4: दूसरा पहलू - मध्य प्रदेश का 'गोबर घोटाला' और स्यूडो-साइंस का उदय

अब हम रिपोर्ट के दूसरे हिस्से की ओर बढ़ते हैं। जहाँ जम्मू में 'आधुनिक विज्ञान' (MBBS) का गला घोंटा गया, वहीं मध्य प्रदेश में 'गोबर विज्ञान' को सरकारी खजाने से सींचा गया। यह कहानी है अंधविश्वास को विज्ञान का जामा पहनाने की जिद और उसके पीछे छिपे भ्रष्टाचार की।


4.1 योजना: पंचगव्य से कैंसर का इलाज (2011)

वर्ष 2011 में मध्य प्रदेश सरकार ने नानाजी देशमुख वेटरनरी साइंस यूनिवर्सिटी, जबलपुर में एक महत्वकांक्षी परियोजना शुरू की। नाम था—"पंचगव्य शोध परियोजना"।


उद्देश्य: गाय के गोबर, गोमूत्र, दूध, दही और घी के मिश्रण (पंचगव्य) से कैंसर, टीबी और अन्य असाध्य रोगों का इलाज खोजना और उसे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित करना 8।

बजट: इस "महान उद्देश्य" के लिए राज्य के खजाने से 3.5 करोड़ रुपये जारी किए गए।

4.2 13 साल बाद: क्या मिला?

आज, 2026 में, जब इस फाइल की धूल झाड़ी गई, तो पता चला कि कैंसर का इलाज तो नहीं मिला, लेकिन सरकारी पैसे से ऐश-ओ-आराम का इलाज जरूर ढूंढ लिया गया। जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के आदेश पर हुई जाँच में जो तथ्य सामने आए, वे किसी भी करदाता (Taxpayer) का खून खौलाने के लिए काफी हैं 10।


घोटाले का 'ब्रेक-डाउन' (Expenditure Breakdown)

Ghotale ka brackdown madhya Pradesh


4.3 शोध का परिणाम: शून्य बटा सन्नाटा

13 सालों में 3.5 करोड़ रुपये फूंकने के बाद, यूनिवर्सिटी ने क्या हासिल किया?


वैज्ञानिक पेपर्स: कोई प्रतिष्ठित पीयर-रिव्यूड जर्नल में प्रकाशन नहीं।

दवा: कैंसर की कोई दवा नहीं बनी।

उत्पाद: जाँच टीम को मौके पर केवल कुछ "दिए" (Earthen lamps) और "गमले" बनाने के सांचे मिले। क्या 3.5 करोड़ रुपये दिए बनाने के लिए दिए गए थे?

जवाबदेही: जब वीसी मनदीप शर्मा से पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट 2018 में बंद हो गया था और तब सब कुछ "ऑडिट" हो चुका था। यानी, लूट पर सरकारी मुहर लग चुकी थी 9।

यह वही मध्य प्रदेश है जहाँ 'व्यापम' जैसा महाघोटाला हुआ था, और जहाँ बच्चों के पोषण आहार (Take Home Ration) में भी ट्रकों के नंबर स्कूटर के पाए गए थे 12। भ्रष्टाचार का यह पैटर्न बताता है कि 'गौमाता' के नाम पर न केवल भावनाओं का दोहन होता है, बल्कि सरकारी खजाने का भी दोहन होता है।


भाग 5: विस्तृत विश्लेषण - विज्ञान बनाम विश्वास (Science vs. Faith)

इन दोनों घटनाओं—जम्मू और जबलपुर—को अलग-अलग करके नहीं देखा जा सकता। ये एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। यह उस 'नए भारत' की तस्वीर है जहाँ विज्ञान को हाशिए पर धकेला जा रहा है और आस्था (या अंधविश्वास) को मुख्यधारा में लाया जा रहा है।


5.1 योग्यता (Merit) का दोहरा मापदंड

भारत का दक्षिणपंथी विमर्श अक्सर "मेरिट" की दुहाई देता है। आरक्षण के खिलाफ तर्क देते समय कहा जाता है कि "योग्यता से समझौता नहीं होना चाहिए।"


विरोधाभास: जम्मू में, वे 44 मुस्लिम छात्र अपनी योग्यता (NEET Score) के बल पर आए थे। यहाँ 'मेरिट' का सम्मान करने के बजाय, उसे 'सांप्रदायिक' चश्मे से देखा गया।

यहाँ मांग यह नहीं थी कि योग्य को मौका मिले, बल्कि मांग यह थी कि "हमारे धर्म के" लोगों को मौका मिले, चाहे वे मेरिट में नीचे ही क्यों न हों। यह "मेरिटोक्रेसी" (Meritocracy) से "थियोक्रेसी" (Theocracy) की ओर बढ़ता कदम है।

5.2 स्यूडो-साइंस का संस्थागतकरण (Institutionalization of Pseudoscience)

रवीश कुमार ने अपने वीडियो में ISRO के हालिया असफलताओं (PSLV मिशन) का उल्लेख करते हुए एक गंभीर चिंता जताई। जब देश के संसाधन और ध्यान "गोबर विज्ञान" पर केंद्रित होंगे, तो वास्तविक विज्ञान का क्या होगा?


विज्ञान तर्क मांगता है, सबूत मांगता है।

पंचगव्य जैसे प्रोजेक्ट आस्था मांगते हैं। जब आप आस्था के नाम पर शोध के लिए पैसा देते हैं, तो आप पहले ही मान लेते हैं कि परिणाम सकारात्मक ही होगा। और जब परिणाम नहीं आता, तो आप फर्जी बिल बनाकर पैसा खा जाते हैं।

यह केवल 3.5 करोड़ का मामला नहीं है। केंद्र सरकार ने भी 'SUTRA-PIC' (Scientific Utilization Through Research Augmentation-Prime Products from Indigenous Cows) जैसी योजनाओं को बढ़ावा दिया है। वैज्ञानिक समुदाय ने बार-बार चेतावनी दी है कि पूर्वाग्रह से ग्रसित शोध (Bias-driven research) विज्ञान नहीं होता।


भाग 6: 'द ट्विस्ट' (The Twist) - क्या कोई दूसरा पक्ष भी है?

एक जिम्मेदार पत्रकार के रूप में, हमें सिक्के के दूसरे पहलू को भी देखना होगा। क्या जम्मू के लोगों की चिंता पूरी तरह निराधार है?


6.1 क्षेत्रीय असंतुलन और असुरक्षा

जम्मू और कश्मीर के बीच दशकों से एक राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक खाई रही है।


जम्मू की शिकायत: जम्मू के लोगों को लगता है कि कश्मीर घाटी (जहाँ मुस्लिम बहुसंख्यक हैं) हमेशा से राज्य की राजनीति और संसाधनों पर हावी रही है।

NEET का ढांचा: चूँकि मेडिकल सीटें राज्य-स्तरीय कोटे (85%) से भरी जाती हैं और कश्मीर की जनसंख्या जम्मू से अधिक है, इसलिए स्वाभाविक रूप से मेरिट लिस्ट में कश्मीरी छात्रों का दबदबा होता है।

तर्क: प्रदर्शनकारियों का तर्क था कि श्राइन बोर्ड की स्थापना हिंदुओं के कल्याण और तीर्थस्थल के प्रबंधन के लिए हुई थी। उनका मानना है कि इस विशिष्ट संस्थान में आरक्षण का कोई प्रावधान (जैसे अल्पसंख्यक संस्थानों में होता है) होना चाहिए था।

कानूनी स्थिति (T.M.A. Pai Foundation Case):


सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुसार, अल्पसंख्यक दर्जा राज्य-स्तर पर तय होता है। जम्मू-कश्मीर में हिंदू अल्पसंख्यक हैं (लगभग 28%)। इस आधार पर, हिंदू संस्थान अल्पसंख्यक दर्जे की मांग कर सकते हैं। लेकिन SMVDIME एक सरकारी सहायता प्राप्त ट्रस्ट द्वारा संचालित है, न कि निजी अल्पसंख्यक ट्रस्ट द्वारा। इसलिए, यहाँ आरक्षण लागू करना कानूनी रूप से जटिल है। विरोध का तरीका (कॉलेज बंद करवाना) निस्संदेह गलत था, लेकिन "अल्पसंख्यक अधिकारों" की मांग एक संवैधानिक बहस का विषय हो सकती थी, न कि सड़क पर गुंडागर्दी का।



भाग 7: निष्कर्ष - एक बीमार राष्ट्र की मेडिकल रिपोर्ट

इस विस्तृत विवेचना के बाद, हम किस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं?


यह रिपोर्ट भारत की वर्तमान स्थिति का एक 'सीटी स्कैन' (CT Scan) है, जिसमें कई जगह ट्यूमर दिखाई दे रहे हैं:


सांप्रदायिकता का ट्यूमर: जो शिक्षा के मंदिरों को भी नहीं बख्श रहा। एक डॉक्टर की पहचान अब उसके स्टेथोस्कोप से नहीं, बल्कि उसकी टोपी या तिलक से की जा रही है।

संस्थागत पतन (Institutional Decay): NMC जैसी संस्थाएं, जिनका काम मानकों की रक्षा करना था, वे राजनीतिक आकाओं के इशारे पर 'हिट-मैन' बन गई हैं।

बौद्धिक भ्रष्टाचार: जहाँ शोध के नाम पर गोबर खरीदा जाता है और कारें चलाई जाती हैं।

आगे की राह (The Way Forward):


अगर हम चाहते हैं कि भारत सच में विश्वगुरु बने, तो हमें:


शैक्षणिक संस्थानों को राजनीति और धर्म से पूरी तरह मुक्त करना होगा।

नियामक संस्थाओं (NMC, UGC) की स्वायत्तता सुनिश्चित करनी होगी।

स्यूडो-साइंस पर सरकारी धन की बर्बादी रोकनी होगी और वास्तविक वैज्ञानिक शोध (R&D) पर खर्च बढ़ाना होगा।


अंतिम शब्द:

"इतिहास गवाह है कि जिन सभ्यताओं ने ज्ञान के दरवाज़े धर्म या जाति के आधार पर बंद किए, वे सभ्यताएं अंधकार में विलीन हो गईं। माता वैष्णो देवी का दरबार सबके लिए खुला है, लेकिन उनके नाम पर बना कॉलेज कुछ खास लोगों के लिए आरक्षित करने की जिद ने आज 50 भविष्य के डॉक्टरों की बलि ले ली। और उधर मध्य प्रदेश में, कैंसर के मरीज तड़प रहे हैं, और उनका हक का पैसा किसी अफसर की गाड़ी के पेट्रोल में जल रहा है। यह धुआँ सिर्फ पेट्रोल का नहीं है, यह हमारे 'साइंटिफिक टेम्परामेंट' की चिता का धुआँ है।"


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परिशिष्ट: तथ्य और आंकड़े (Data Appendix)

तालिका 1: SMVDIME कॉलेज बंद होने का घटनाक्रम

Correction of madhya pradesh


तालिका 2: मध्य प्रदेश पंचगव्य घोटाला (वित्तीय अनियमितताएं)

Mp me croro ka ghotala


(यह रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध दस्तावेजों, समाचार रिपोर्टों और वीडियो साक्ष्यों पर आधारित है। इसका उद्देश्य सत्य को उजागर करना और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करना है।)



पाठकों द्वारा अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ & Related Queries)

(इस रिपोर्ट में शामिल मुख्य विषय और पाठकों के संभावित सवाल)


1. Q: जम्मू का 'माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज' (SMVDIME) अचानक क्यों बंद किया गया? A: आधिकारिक तौर पर NMC ने 'इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी' और फैकल्टी की शॉर्टेज का हवाला दिया है। लेकिन रिपोर्ट्स और स्थानीय प्रदर्शनों से संकेत मिलता है कि 50 में से 44 मुस्लिम छात्रों का चयन और उसके बाद हुआ राजनीतिक विरोध इसका मुख्य कारण था, न कि केवल कमियां ।   


2. Q: मध्य प्रदेश का 'पंचगव्य' (गोबर-गोमूत्र) घोटाला क्या है? A: 2011 में नानाजी देशमुख यूनिवर्सिटी (जबलपुर) को गाय के गोबर और गोमूत्र से कैंसर के इलाज पर शोध के लिए 3.5 करोड़ रुपये मिले थे। हालिया जाँच में पता चला कि शोध के बजाय अधिकारियों ने इस फंड से निजी कारें, एसी खरीदे और गोवा की हवाई यात्राएं कीं, जबकि रिसर्च का नतीजा 'शून्य' रहा ।   


3. Q: क्या NEET की मेरिट लिस्ट में धर्म या 'सांप्रदायिक' आधार पर चयन होता है? A: नहीं, NEET एक पूरी तरह से पारदर्शी और योग्यता-आधारित परीक्षा हैजम्मू के मामले में भी छात्रों का चयन उनके मार्क्स के आधार पर हुआ था। विवाद तब शुरू हुआ जब कुछ संगठनों ने मेरिट की जगह 'धार्मिक जनसांख्यिकी' (Religious Demography) को मुद्दा बना दिया ।   




Works cited

1. गोबर का घोटाला, MBBS का कोर्स बंद, accessed January 13, 2026, Full report


2. Students shocked over closing of Vaishno Devi medical college in Jammu over 'poor infrastructure' - The Hindu, accessed January 13, 2026, Full Report


3. Muslim students got most seats, then came protest: Jammu's Vaishno Devi medical college loses nod | Row 

explained - Hindustan Times, accessed January 13, 2026, Full Report


4. Explained: Why NMC shut down the MBBS course at Vaishno Devi medical college in J&K, accessed January 13, 2026, Full Report


5. ‘No due process’: Vaishno Devi medical college got nod 4 months before NMC withdrew permission, accessed January 13, 2026, Full Report


6. NMC withdraws MBBS permission at Shri Mata Vaishno Devi ..., accessed January 13, 2026, Full Report


7. Medical college row: Omar says Jammu's loss, blames protesters for 'destroying' students' future; BJP & Hindu groups celebrate - Times of India, accessed January 13, 2026, Full Report


8. Bets10 Analysis: Uncovering the Rs 3.5 Crore Scam in Madhya Pradesh's Cow-Based Cancer Research Scheme - Toyota of Whittier, accessed January 13, 2026, Full Report


9. MP's 'gau mutra, gobar cancer project' funds splurged on cars, travel: Probe, accessed January 13, 2026, Full Report


10. MP gaumutra, gobar cancer cure project: Probe finds Rs 3.5 crore ..., accessed January 13, 2026, Full Report


11. Rs 3.5 crore scam at Nanaji Deshmukh Veterinary Science ..., accessed January 13, 2026,  Full Report  


12. Audit report flags misuse of funds in Madhya Pradesh - The Hindu, accessed January 13, 2026, Full Report


13. Multiple complaints, surprise inspection: National Medical Commission withdraws MBBS nod to Vaishno Devi medical college amid row over admission to Muslims, accessed January 13, 2026,Full Report

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